बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ योजना Beti padhao beti bachao yojna

बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ योजना (Beti padhao beti bachao yojna)

आपको तो पता ही है कि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी 2015 में यह एक बड़ी योजना पानीपत हरियाणा में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना लागू की गई। आप सब को पता ही है कि हमारे भारत की आबादी बड़े जोर के साथ बढ़ती जा रही है हमारे दुर्भाग्य की बात है तो यह है कि जो जनसंख्या बढ़ रही है उस में लड़कियों की कमी होती जा रही है। दिनों दिन लड़कियां कम हो रही हैं। जो 2001 में गणना हुई थी उस गणना के अनुसार 1000 लड़कों में केवल 927 लड़कियों की जनसंख्या थी। अब 2011 में 918 हो गया है अगर इसी तरह चलता रहा तो कुछ ही दिनों में या कुछ वर्षों में ही ऐसी जनसंख्या कम होती रही तो इस अपराध के कारण ही एक दिन हमारा देश अपने आप ही नष्ट होने की स्थिति में आ जाएगा। इस अपराध के कारण ही यह योजना प्रधानमंत्री द्वारा लागू की गई है। लोगों को जागरुक बनाने के लिए ही बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की योजना शुरु की गई है।

क्या है बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का मुख्य उद्देश्य (Kya hai beti bachao beti padhao ka mukhya udyeshya)

इसका उद्देश्य यह है कि हमें कन्या भ्रूण हत्या को रोकना चाहिए। कन्या भ्रूण हत्या रोकने वाले का साथ भी देना चाहिए। कन्या भ्रूण हत्या एक बहुत ही बड़ा अपराध और पाप है। हम इस अपराध को रोककर देश को नष्ट होने से बचाया जा सकता है। हमें इस दिशा में लोगों को जागरुक करना चाहिए। क्योंकि हमारे देश में बेटियों का आंकड़ा गिर रहा है हमें बेटियों की सुरक्षा करनी चाहिए ल। आए दिन छेड़छाड़ बलात्कार जैसे अपराध दिन-ब-दिन बढ़ते ही जा रहे हैं। जिसकी कोई सीमा ही नहीं है। इन अपराधों को नियंत्रित करने के लिए अहम निर्णय लिए गए हैं। वित्त मंत्री अरुण जेटली अपने बजट से बेटियों को पढ़ने और बचाव के लिए 100 करोड़ राशि की शुरुआत की है।

 

बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत दी जाने वाली सुविधाएं (Beti bachao aur beti padhao yojna ke antargat di jaane vali suvidhayen)

क्योंकि आपको पता ही है कि हमारे देश की महिलाएं किसी भी कोने में सुरक्षित महसूस नहीं करती हैं। इसलिए उनको सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए गए हैं। जिसके लिए 50 करोड़ रुपए का फंड दिया जाएगा। जिसमें महिलाओं के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा दी जाएगी।

अलर्ट बटन alert button
इस अलर्ट बटन के जरिए महिला अपनी संदेश यानी कि वॉइस मैसेज इमेजेस और कई चीजें भेज सकती है ताकि उन को सुरक्षा प्रदान की जा सके।

संकट प्रबंधन केंद्र( sankat prabndhan kendr)

अगर महिलाओं को कोई भी असुविधा हुई तो इस स्थिति में उचित कार्यवाही संकट प्रबंधन की सुविधा दी जाएगी। ये संकट प्रबंधन की जिम्मेदारी है।

जागरूकता (jagrukta)

सरकार हम महिलाओं को सुविधा दे रही है हमें जागरुक कर रही है हम अपनी बेटियों को बचाएं और बेटियों को पढ़ाए। हमें आगे भी जागरूक होना है। हम अपनी बेटियों को पढ़ाएं हमारे देश में बेटियों की कमी है हमें अपना देश बेटियों से हरा-भरा करना है। प्रधानमंत्री द्वारा इन्हें सुरक्षा मांगने पर सुविधा दी जाएगी। हम जागरुक हो और बेटियों को भी जागरुक करें। यह योजना बेटियों की सुरक्षा के लिए ही शुरू किया गया है। हमारे देश में महिलाएं सुरक्षित नहीं है इसलिए यह योजना जरूरी है।

 

हमारे प्रधानमंत्री तो विशेष योजना बनाई हैं। और लागू भी की गई है। लेकिन हमारी जनता उस पर कितना ध्यान दे रही है या नहीं यह तो जनता को पता है। इस दिशा में कई भी उपयुक्त कामं किए जा रहे हैं। कई विज्ञापन,स्लोगन, इन पोस्टर बनाए रहे हैं। जिस कारण से हमारे देश की बेटियां बचाओ बेटी पढ़ाओ का लक्ष्य हांसिल करना है।

जनता की जागरूकता( janta ki jaagrukta

बेटियों को बचाना हमारे देश वासियों का कर्तव्य है इन्ही इनका पूरा ध्यान देना चाहिए। पढ़ाई में उनकी मदद करनी चाहिए। बेटियों की पढ़ाई भी जरुरी है हम सब को मिल-जुलकर बेटियों की रक्षा करनी है इन्हें आगे बढ़ाना है। इनसे ही हमारा देश बढ़ेगा। बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए एकता बनाए। बेटियों की सुरक्षा के लिए जागरूक होना जनता को जरूरी है। जो भी घिनोनें अपराध बढ़ रहे हैं उनको भी नियंत्रित करने के लिए सरकार अहम निर्णय लिए हैं। अलर्ट बटन के जरिए महिलाओं का संदेश भी सुना जाएगा और इन्हें सुविधा भी दी जाएगी। ये सब हम विश्वास के साथ ही सब कुछ कर सकते हैं। हम अपनी बेटियों को बचाएं और पढ़ाएं। सरकार द्वारा अगर बेटियों को पढ़ाएंगे तो उन्हें बढ़ाएंगे।

धनतेरस 2017- लक्ष्मी का है आगमन dhanteras 2017-laxmi ka hai aagman

धनतेरस 2017- लक्ष्मी का है आगमन (dhanteras 2017-laxmi ka hai aagman)

हिंदू प्राचीन कथाओं के अनुसार धनतेरस पर सूर्य अस्त होने पर यानी कि प्रदोष काल में पूजा करनी चाहिए। धनतेरस के दिन की पूजा का जो सबसे अच्छा मुहूर्त है उसी में पूजा करनी चाहिए। पौराणिक कथाओं के अनुसार, हमें लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में ही करनी चाहिए। क्या आप जानते हैं कि धनतेरस को धनवंतरी त्रयोदशी भी कहते हैं। धनतेरस पूजा को धनवंतरी त्रियोदशी, धनवंतरी जयंती पूजा, यमद्वीप और धनत्रयोदशी इन सब रूपों में इसे पूजा जाता है।

धनतेरस 2017( dhanteras 2017)

यह धनतेरस को पूरे भारत में आस्था के साथ मनाया जाता है। और 2017 में इसे भारत और दूसरे देशों में भी 17 अक्टूबर मंगलवार को मनाया जाएगा।

धनतेरस क्या है (dhanteras kya hai)

धनतेरस पूरे भारत के साथ-साथ दूसरे देशों में भी 5 दिन लंबे दिवाली समारोह के पहले दिन का त्यौहार है।

धनतेरस का अर्थ है (dhanteras ka arth kya hai)

हिंदू चंद कैलेंडर के अनुसार कार्तिक के महीने में 13 दिन धन की पूजा की जाती है। इसे ही धनतेरस कहा जाता है। इस दिन धन के लक्ष्मी की पूजा होती है और इस दिन नई नई वस्तुएं खरीदी जाती है। क्योंकि हिंदू परंपरा के अनुसार माना जाता है कि नई वस्तु खरीदने से घर में लक्ष्मी आती है।

धनतेरस कैसे मनाया जाता है( dhanteras kaise mnaya jaata hai)

धनतेरस पर लोग अपने घरों की साफ सफाई करते हैं। अपने अपने घरों को अच्छी तरह से सजाते हैं। मिट्टी के दिए जलाते हैं और कई परंपराओं का पालन करते हैं। देवी लक्ष्मी के पैरों को लाकर अपने घरों में लगाते हैं
बने बनाए पैर भी मार्केट में मिलते हैं। जिसे घर में चिपकाए जाते हैं। फिर सूर्यास्त के बाद गणेश और लक्ष्मी की पूजा करते हैं। गुलाब और गेंदे के फूल की माला लाते हैं। पूजा के लिए मिठाई, देसी घी का दीपक, धूप, अगरबत्ती यह सब का इस्तेमाल किया जाता हैं।इन सब से घर मे पूजा करने से समृद्धि और अच्छे के लिए पूजा होती हैं। लोग देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की मन वह मन में उच्चारण भक्ति, गीत, आरती बड़े भाव के साथ गाते हैं। नए कपड़े और गहने औरतें पहनती हैं। यह सब अपने घर की खुशहाली के लिए किया जाता है।

धनतेरस की कहानियां और किवदंतियां (dhanteras ki kahaniyan)

धनतेरस की खुशी इसलिए मनाई जाती है क्योंकि ये राजा हिमा के 16 साल के बेटे की कहानी पर आधारित है। राजा के बेटे के बारे में ऐसी भविष्यवाणी हुई थी, कि उसकी मृत्यु शादी के चौथे दिन ही हो जाएगी। सांप के काटने की वजह से ऐसा होगा। उसकी पत्नी बहुत ही समझदार और चालाक थी। उसने अपने पति का जीवन बचाने का रास्ता सोच लिया था। उस दिन अपने पति को उस ने सोने नहीं दिया था। उसने अपने सोने चांदी के आभूषणों को इकट्ठा किए। अपने सोने वाले कमरे मे इन सब का ढेर लगा दिया और अपने शयनकक्ष में ढेर सारे दिए जला दिए। उसने ऐसा इसलिए किया था कि उसका पति जागता रहे। मृत्यु के देवता यम सांप के रूप में पहुंचे तो गहने और दिए की रोशनी से उनकी आंखे चौंधिया गई। वह कमरे में घुस नहीं पाए। फिर उन्होंने सिक्के के ऊपर से कूद के जाना चाहा, तो राजकुमार की पत्नी की मधुर गीत सुनते सुनते ही रात बीत गई। धीरे धीरे सुबह हो गई और वह बिना राजकुमार को लिए ही वापस चले गए। इस तरह अपने पति की रक्षा की। उस दिन से यह दिन धनतेरस के रूप में ये पर्व मनाया जाता है।

धनतेरस परंपराएं (dhanteras pramprayen)

धनतेरस की कई परंपरा है। अलग-अलग देशों में अलग-अलग परंपराएं हैं। नए बर्तन, सोने के आभूषण, चांदी के सिक्के, कैलेंडर, नई चीजें खरीदने से नया विचार मन में आता है। लोगों का मानना है कि नई चीजें लाने से साल भर हम नए विचारों को सोचते रहेंगे। घर में नई चीजें के आने का मतलब साल भर हमारे घर में लक्ष्मी लाने की पहचान है। लक्ष्मी की पूजा शाम को की जाती है। अलग-अलग रीती रिवाज है। जैसे कि दक्षिण भारत में गायों की पूजा की जाती है। क्योंकि गाय में लक्ष्मी का वास होता है। इसलिए यह धनतेरस का त्यौहार मनाया जाता है। हम इस तरह का खुशी और उल्लास से मनाते हैं। हमें बहुत खुशी मिलती है। यह हमारे त्योहार बुराइयों को छोड़कर अच्छाई और हमें ले जाता है।

ये सब रिवाज है धनतेरस मनाने के पीछे। इस दिन देवी लक्ष्मी का अहम पूजा होती है।

आती हे दीवाली से एक दिन पहेले करती हे पैसो की बारिश कहते हे हम इसको धनतेरस ये तो हे बड़ी सुहानी बड़ी मस्त..

हॅपी धनतेरस.. (happy dhanteras)

उद्योग आधार के लाभ व रजिस्ट्रेशन की जानकारी। Benefits And Information About Udyog Aadhar

उद्योग आधार के लाभ व रजिस्ट्रेशन की जानकारी। (benefits and information about udyog aadhar)

हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी हर तबके के लोगों को एक साथ लेकर विकास की ओर अग्रसर होने की कोशिश कर रहे हैं। हमारे देश के विकास के लिए धन का सबसे ज्यादा बड़ा हिस्सा हमारे देश में होने वाले व्यापार से आता है। इसलिए हमारे देश की सरकार व्यापार में हमारी सहायता करने के लिए बाध्य है। आज हम आपको इसकी पूरी जानकारी देने जा रहे हैं।

उद्योग आधार क्या है ? (What is udyog aadhaar )?

उद्योग आधार एमएसएमई मंत्रालय द्वारा जारी किया गया 12 अंकों का पंजीकरण है। यह भारत सरकार द्वारा जारी किया जाता है। काफी समय से आ रहे चले आ रहे छोटे छोटे उद्योगों को और इसी तरह के नए उद्योगों को इस तरह का पंजीकरण दिया जा रहा है। उद्योग आधार को प्राप्त करने के लिए पंजीकरण कराना आवश्यक होता है। 18 सितंबर 2015 को सरकार ने इस के हवाले से उद्योग आधार मेमोरेंडम जारी किया था। उद्योग आधार की सहायता से MSME के अंतर्गत आप चाहे तो पंजीकरण करा सकते हैं।

पहले एमएसएमई के अंतर्गत पंजीकरण कराने के लिए लोगों को बहुत सी कागजी कार्रवाई करनी पड़ती थी। इसके लिए उन्हें EM 1 और EM 2 नामक दो फॉर्म को भरना पड़ता था। यह काम बहुत ही ज्यादा पेचीदा होता था। लेकिन जबसे उद्योग आधार आ गया है लोगों को इस विभिन्न तरह के फॉर्म को भरने की आवश्यकता नहीं रही है। यदि आपका व्यापार स्मॉल, मीडियम या फिर माइक्रो इंडस्ट्री में करना चाहते हैं तो आप बहुत ही आसानी से पंजीकरण करा सकते हैं। यह पंजीकरण ऑनलाइन शुरू किया जा चुका है। इसलिए ऑनलाइन पंजीकरण करने के लिए बहुत ही ज्यादा कम समय लगता है और इसके साथ-साथ हमें गैरजरूरी औपचारिकताओं से भी राहत मिलती है।

एमएसएमई विभाग क्या है?(What is MSME department ?)

एमएसएमई नामक विभाग हमारे देश में चल रहे स्मॉल, मीडियम और माइक्रो व्यापार को बढ़ावा देने के साथ-साथ उन्हें नियंत्रित करने का भी कार्य करता है। इसके अलावा यह विभाग इस तरह के उद्योगों को शुरू करने के लिए तकनीकी तथा आर्थिक सहायता भी प्रदान करता है। आजकल यह मंत्रालय कलराज शर्मा के अधीन है। कलराज शर्मा 26 मई 2014 से इस पद पर कार्यरत हैं।

उद्योग आधार की पृष्ठभूमि
(Udyog aadhar scheme)

सन 2006 में हमारे देश की सरकार द्वारा एक अधिनियम संसद में पास कराया गया। इस नीति को अमल में लाया गया। इस अधिनियम के अनुसार हमारे देश की सरकार सभी छोटे और मध्यम उद्योगों को विश्व स्तर पर लाने की कोशिश करेगी तथा उनके बीच में प्रतियोगिता बढ़ाने की भी। MSMED अधिनियम के अनुसार MSME मुख्यतः दो भागों में बांटा गया है।

1. सर्विस इंटरप्राइजेज
इस विभाग के अंतर्गत वह उद्योग जो हमें विभिन्न तरह की सेवाएं देते हैं वह उद्योग आते हैं।

2. मैनुफैक्चरिंग इंटरप्राइजेज
इसके अंतर्गत बड़े छोटे प्लांट मशीनरी में निवेश किया जाता है।

उद्योग आधार के लाभ।
(benefits of udyog aadhar)

1. उद्योग आधार का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसके अंतर्गत पंजीकरण कराने के लिए सारी औपचारिकताएं हमें ऑनलाइन ही पूरी करनी पड़ती है।

2. उद्योग की जानकारियों की लिए हम चाहे तो अपने हिसाब से फॉर्म को भर सकते हैं।

3.इस पंजीकरण को कराने के लिए उधमी को अपने नाम, पता, बैंक डिटेल आदि देना पड़ता है।

4. यदि एक व्यक्ति चाहे तो वह एक से अधिक उद्योग आधार फॉर्म भर सकता है।

5. एक बार अगर आपका फॉर्म अपलोड हो गया तो फॉर्म के समय दिए गए ईमेल पर आपके पंजीकरण संख्या आ जाती है।

6. इस फॉर्म को भरने के लिए हमें सरकार की तरफ से लगाए हुए किसी भी शुल्क का भुगतान नहीं करना पड़ता।

उद्योग आधार के लिए आवश्यक दस्तावेज।
(Udyog aadhar documents)

1. यदि आवेदक के पास किसी तरह की जाती प्रमाण पत्र है तो उसे जमा देने की आवश्यकता होती है।

2. उद्योग आधार के लिए कौन से आवश्यक दस्तावेज है।

3. आवेदक के पास इस फॉर्म को भरने के लिए 12 संख्या का आधार संख्या होनी आवश्यक होती है।

4. उद्योग आधार में आपने जो भी नाम दिया है उद्योग के मालिकाना हक के लिए उसी नाम का प्रयोग किया जाएगा।

5. यदि आप व्यापार चलाना चाहते हैं तो व्यापारिक संस्था का कानूनी तौर पर सही नाम देना अति आवश्यक है।

6. यदि कोई व्यक्ति चाहे तो वह एक से अधिक उद्योग आधार के लिए आवेदन कर सकता है।

7. आवेदक को संस्था का प्रकार का प्रमाण देना होता है।

8. व्यापारिक स्थल के पते का प्रमाण पत्र, फोन नंबर, ईमेल एड्रेस देना अनिवार्य है।

9. उद्योग शुरू होने की तारीख का प्रमाण भी आवश्यक होता है।

उद्योग आधार के लिए पंजीकरण करने की विधि। (udyog aadhar registration online and offline)

1. इसके पंजीकरण के लिए ऑफलाइन या ऑनलाइन किसी भी तरह का आवेदन किया जा सकता है।

2. इसकी सहायता से सरकार द्वारा दी जा रही है अलग अलग तरह की सेवाओं का आवेदक लाभ उठा सकता है। और इसका लाभ उठाते हुए अपने व्यापार का विस्तार भी कर सकते है।

3. पंजीकरण किए गए एंटरप्राइजेस को सरकार अलग-अलग तरह की सब्सिडी मुहैया कराती है।

4. यदि आवेदक विदेश में होने वाली प्रदर्शनी में भाग लेना चाहता है तो उसे सरकार द्वारा विदेश जाने के लिए पैसा दिया जाता है।

5. इस तरह आधार उद्योग से जुड़कर छोटे, मध्यम, सूक्ष्म व्यापारी अपने विकास अपने व्यापार को विकास की ओर अग्रसर कर सकते हैं और अपने व्यापार को एक नई दिशा देने में सक्षम हो सकते हैं।

6. इसके अलावा व्यापारी सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ भी ले सकते हैं और कई लोग तो इसका लाभ उठा भी रहे हैं।

Diwali information in hindi

दीपावली-दीयों का पर्व

भारत पर्व का देश माना जाता है। यहां पर हर होने वाले पर्व पर आपको खुशियां, सुख, शांति और एकता मिलेगी। यह हमारे सांस्कृतिक, परंपरा, सामर्थ्य, सामाजिकता और एकता की कड़ी को जोड़े रखता है। हर एक पर्व का अपना अलग ही महत्व है। परंतु हर एक पर्व हमारी जिंदगी में खुशियां भर देता है। हर एक पर्व के पीछे कोई ना कोई सामाजिक परंपरा या सांस्कृतिक या किसी भी तरह की कथाएं जरुर जुड़ी रहती है। जिससे हमें नया कुछ सीखने को मिलता है।

आज हम जगमगाते दीपों का त्योहार यानी की दीवाली की बात करने जा रहे हैं। जैसे ही यह पर्व आता है उससे पहले ही लोगों के मकान, दुकानें और घरों की सफाई चालू हो जाती है। इस पर्व के आने से लोगों के दिलों में और उनके जिंदगी में एक जोश आ जाता है। एक खुशी की लहर दौड़ने लगती है।

नामकरण- दीपावली दो शब्दों को मिलाकर बना है दीप + अवली। जिसका मतलब होता है दीपों की पंक्ति। इस पर्व पर हर घर में दिए जरूर जलाए जाते हैं। इसी वजह से इसका नाम दीपावली पड़ा।

दीवाली से सम्बद्ध कहानियां-

इस पर्व के साथ अलग-अलग धर्म की अलग-अलग कथाएं जुड़ी हुई है। पर इन सब कथाओं में से सबसे प्रमुख कथा, प्रभु राम की मानी जाती है। क्योंकि इस दिन श्री रामचंद्र जी अत्याचारी रावण को उसके पापी शरीर से मुक्ति दिला कर अयोध्या वापस लौटे थे, और जब वह अयोध्या वापस आए तो उनका राज्य पूरा हर्षित हो गया। क्योंकि वह सबके प्रिय राजा थे। उनके वापस आने की खुशी में लोगों ने दीपों से अपने घर को जगमग कर दिया। तब से यह त्यौहार इसी तरह से मनाया जाने लगा।

यह तो थे राम भक्त के लोगों की कहानी। परंतु कृष्ण भक्ति के लोग इसलिए इस त्योहार को मनाते हैं क्योंकि इसी दिन कृष्ण ने नरकासुर को मारा था और उसके चंगुल से कम से कम 16000 रमणियों को आजादी दिलवाई थी। क्योंकि यह शासक बहुत ही अत्याचारी था, इसलिए इसके मरने की खुशी में लोगों का मन मोर की तरह नाचने लगा और उन्होंने खुशी में अपने घर में दीपक जलाए।

इसके पीछे एक और कथा है। इसी दिन समुद्र मंथन भी हुआ था और समुद्र मंथन होने पर लक्ष्मी जी प्रकट हुई थी। उनके प्रकट होने पर देवताओं ने उनकी पूजा की थी।

वहीं कुछ भक्त यह भी मानते हैं कि इस दिन यानी कि धनतेरस के दिन भगवान विष्णु ने नरसिंह का रूप धरा था और अपने भक्त प्रहलाद को हिरणाकश्यप से छुटकारा दिलाया था।

वहीं सिख धर्म के लोगों की अलग मान्यता है। उनका कहना है कि इसी दिन उनके छठे गुरु हरगोविंद सिंह जी को जेल से रिहाई मिली थी। इसलिए सिख लोग भी इस पर्व को बहुत धूमधाम से मनाते हैं। इसके इलावा कुछ लोग यह भी मानते हैं महर्षि दयानंद को भी इसी दिन स्वर्ग प्राप्त हुआ था।

इस पर्व के साथ बहुत सारी कहानियां जुड़ी हुई है। जितनी भी कहानी आप सुनेंगे वह सब कम है परंतु प्रमुख कहानियां यही है।

पर्व का आयोजन- दीपावली का त्योहार जैसे ही आता है। उसके आगे पीछे त्योहारों की लड़ी लग जाती है। दीपावली से 2 दिन पहले त्रयोदशी को धनतेरस मनाते हैं। धनतेरस पर लोग नए बर्तन खरीदते हैं। चतुर्दशी को नरक चौदस मनाया जाता है। अमावस्या को दीपावली मनाई जाती है। दीपावली से अगले दिन लोग गोवर्धन पूजा के लिए जाते हैं। क्योंकि माना जाता है कि इस दिन कृष्ण जी ने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली से उठाकर गोकुल धाम वासियों की इंद्र के प्रकोप से रक्षा की थी। उस के दूसरे दिन भैया दूज मनाया जाता है।

महत्त्व- इस त्यौहार को छोटे-बड़े, गरीब-अमीर हर तरह की जाती, हर तरह के लोग मनाते हैं। अगर आप बाजारों में जाएंगे तो पूरी बाजार दुल्हन की तरह सजी दिखाई देती है। रंग बिरंगे खिलौने, रंग बिरंगे फूल, पुष्पमालाएं, रंग बिरंगी मिठाईयां देखने को मिलते हैं। वही बालक इस पर्व को लेकर अति उत्साहित रहते हैं और उनका उत्साह पटाखों के जरिए हम देख सकते हैं। सबसे बेहतरीन दृश्य होता है दीवाली की रात का, इस दिन सभी घर ऐसे लगते हैं जैसे शादी वाले घर हैं।

इन सबके अलावा दीपावली व्यापारियों के लिए भी बहुत ही महत्वपूर्ण और शुभ दिन माना जाता है। इस दिन व्यापारी अपने पुराने बही खाता बंद करते हैं और नए तरीके से व्यापार आरंभ करते हैं। सभी धर्म और जाति के लोग इस पर्व को अति उत्साह से मनाते हैं। दिवाली पर सफाई होने के पीछे कारण यह भी है कि दिवाली से पहले वर्षा ऋतु होती है, जिसकी वजह से घर में दुर्गंध आ जाती है और सफाई हो जाने के बाद दिवाली वाले दिन पूरा घर सुगंधित हो उठता है।

दिवाली जैसे उत्साह वाले दिन दुख तब होता है, जब इस दिन लोग इस त्योहार को गलत तरीके से मनाते हैं। कहने का भाव है कि कुछ लोग इस दिन जुआ खेलते हैं, शराब पीते हैं जो कि बिल्कुल ही गलत आदत है। इस दिन हमें नास्तिक,अराष्ट्रीयता और नकरात्मक चीजों का त्याग कर देना चाहिए।

उपसंहार-

दिवाली भारत का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है। इसके महत्व को हमें गलत रूप में नहीं लेकर जाना चाहिए। इसके महत्व को हम समझे। जुआ खेलकर और शराब पीकर इस पर्व को ना मनाए। इस त्यौहार को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाएं। त्योहारों की वजह से ही देश में एकता होती है। इसलिए महत्वता को समझने की कोशिश करें और इसके सभी नियमों का पालन करें। इस महान पर्व पर बुराई करने वालों का विरोध करें और खुद बुराइयों से बचे।

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