दीवाली की शुभकामनाएं दीवाली एसएमएस happy diwali wishes diwali sms

दीवाली की शुभकामनाएं दीवाली एसएमएस (happy diwali wishes diwali sms in hindi )

दिवाली दीपों का रोशनी का पर्व है। इस दिन दिए जलाकर हम अपने घर को रोशन कर देते है। जब उस पर्व के दिन सब जगह रोशनी दिखाई देती है तो ऐसा लगता है हमारी जिंदगी से अँधेरा कहीं दूर भाग गया है। और रोशनी ने अपने सकरात्मक चमक के साथ हमारी जिंदगी में जान डाल दी है। दिवाली जगमगाते रोशनी का त्यौहार है।।इसलिए इसको शांति और प्रेम के साथ मनाएं। आतिशबाजी करना बुरी बात नहीं है परंतु बड़ी-बड़ी आतिशबाजियों से होने वाले नुकसान से जो बुरा प्रभाव पड़ता है। वो बहुत ही हानिकारक होता है। इसलिए कोशिश करें इको फ्रेंडली दिवाली मनाएं। जिससे किसी का नुकसान ना हो। इससे आपके भी खर्चे बचेंगे। इको फ्रेंडली दिवाली मनाने से साफ सफाई बरकरार रहेगी। आपके खर्चे भी बचत होगी। प्रेम और प्यार भी बढ़ेगा और किसी का नुकसान भी नहीं होग। हम तो यही आशा करते हैं कि आप भी इस दिवाली सब रंजिशें और गिले शिकवे मिटा कर अपने दोस्तों के गले लगे और इस दिवाली की चमक की तरह अपनी जिंदगी में भी खुशियों की चमक लाए। हैप्पी दिवाली

दीवाली की शुभकामनाएं (happy diwali wishes in hindi)

  • हम जो आकाश में आतिशबाजी जलाते हैं वह हम अपनी खुशियों को जताते हैं।
    क्यों ना इस बार हम दीपावली पर आपसी कटुता, नफरत,
    रंजिश को जला दे।दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं

  • दिवाली की शुभ बेला में अपने मन का अंधकार मिटाए,
    मिठाइयां खाएं पटाखे चलाएं और दीपों के इस त्यौहार को मनाए।
    शुभ दिवाली

  • भाईचारे का त्योहार है दिवाली,
    बच्चों के आपसी प्यार का पर्व है दीवाली,
    छोड़ दो सारे आपसी रंजिश
    मना लो एक साथ फिर से दिवाली।
    दीवाली की शुभकामनाएं

  • सुख संपदा आपके जीवन में आए,
    लक्ष्मी जी आपके घर में समाएं,
    भूलकर भी आपके जीवन में आगे कभी भी एक दुख ना आए।

  • श्री राम जी आपके घर सुख की बरसात करे,
    दुखो का नाश करें, प्रेम की फुलझड़ी और अनार आपके घर को रोशन करें,
    रोशनी के लिए आपकी जिंदगी में खुशियां लाए,
    हैप्पी दीपावली

  • मिठाइयों की खुशबू से महके आपका घर आंगन,
    फूलों की खुशबू से महके आपका घर आंगन,
    कोई दुख ना आए आपके आसपास,
    खुशियों की चमक से महके आपका घर आँगन।
    आप सबको दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं

  • आपसी रंजिश हमेशा बढ़ाती है मतभेद,
    दिवाली पर दूर करो चढ़ा दो इन्हें भेंट,
    बढ़ा लो आपस मे नज़दीकियां अपने आप आ जाएंगी प्यार में करीबियां।
    हैप्पी दीपावली

  • जिंदगी की हर सुबह एक आस है,
    ढूंढो तो मिल जाएगी खुशी क्योंकि वह तुम्हारे पास है,
    दिवाली के दिन करो लक्ष्मी का स्वागत क्योंकि यह दिन तुम्हारे लिए खास है।
    दिवाली का दिन आप सब को मुबारक हो

  • पटाखों से गूंज उठता है आसमान
    ऐसे दिन करो बुराई का खात्मा
    लगा लो गले से अपनों को
    बुनलो एक नए सपनों को
    दिवाली आप सबके घर में खुशियां लाएं

  • एक दिया जलाओ गणेश जी के नाम का,
    एक दिया जलाओ लक्ष्मी जी के प्रसाद का,
    एक दिया जलाओ मेरी इस शुभकामना का,
    सफलता चूमे तुम्हारे हाथ सदा शुभ दीवाली

  • दीपों की तरह जगमगाते रहे तुम्हारी जिंदगी,
    लक्ष्मी जी का आशीर्वाद पाती रहे तुम्हारी जिंदगी,
    ये ही है शुभकामना मेरी, खुशियों से चमचमाती रहे तुम्हारी जिंदगी शुभ दीपावली

अन्य पढे:

 

ha

गोवर्धन पूजा कथा विधि महत्व

गोवर्धन पूजा कथा विधि महत्व (Govardhan puja vidhi,mahtva)

गोवर्धन पूजा दिवाली के अगले दिन ही होता है इसे अंकुट भी कहते हैं। किसान भाई बड़े भाव से इस पूजा को करते हैं। जलवायु और प्राकृतिक संसाधनों को धन्यवाद देते हैं।

गोवर्धन पूजा का महत्व (govardhan puja ka mahtav)

गोवर्धन पूजा का महत्व है कि हमारा जीवन प्रकृति की हर एक चीज पर ही निर्भर है जैसे कि पेड़,पौधे, पशु, पंछी,नदी, पर्वत उन पर ही निर्भर है। इसलिए हमें उनका ध्यान देना चाहिए। हमारे भारत देश में जलवायु संतुलन का बहुत बड़ा महत्व है। जलवायु संतुलन का विशेष कारण पर्वत मालाएं एवं नदियां हैं। प्राकृतिक धन-संपत्ति के प्रति हमारी भावना व्यक्त करता है। गोवर्धन के दिन गोवर्धन पर्वत की पूजा बड़े श्रद्धा भाव से की जाती है। यह गोवर्धन पूजा दिवाली के दूसरे दिन होती है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाई जाती है। इस गोवर्धन पूजा में गाय माता की पूजा की जाती है क्योंकि गाय माता के ही दूध की छाछ, दही, मक्खन यहां तक कि गाय का गोबर, गाय का मुत्र भी हमारे जीवन का कल्याण करता है। गाय का गोबर, दूध, मुत्र सब पूजा के काम आता है। गाय हमारे हिंदू धर्म में गंगा नदी के बराबर मानी जाती है। इसे गोवर्धन पूजा के अन्नकुट भी कहते हैं। अंकुट में भंडारा होता है कई जगह तो यह एक पार्टी जैसा भी मनाया जाता है और यह महीनों तक चलता रहता है। यह पूजा बहुत ही अच्छी लगती है।

गोवर्धन पूजा की कथा ( govardhan puja ki katha )

गोवर्धन पूजा एक पौराणिक कथा है। कहते हैं कि भगवान कृष्ण का जन्म तो गोकुल में हुआ था। गोकुल में जन्म लेने के बाद ग्वाले के बीच में रहकर भगवान कृष्ण ने विशेष लीलाएं करी थी। कई लोगों का घमंड भी तोड़ा था। कईयों का उद्धार भी किया था। उन्हीं लोगों में एक इंद्रदेव भी है। गोकुल के लोग अच्छी फसल अच्छी जलवायु के लिए इंद्र देव का पूजा भी करते थे। गोकुल वासी हर वर्ष नाचते गाते हुए इंद्र देव की पूजा अर्चना करते थे। इस पूजा को जानने के लिए कृष्ण भगवान ने नंद बाबा से पूछा, यह पूजा क्यों आप करते हैं और किसके लिए करते हैं। तब नंदबाबा ने बाल कृष्ण को बताया कि यह पूजा हम इंद्र देव के स्वागत के लिए करते हैं। इस पर बाल कृष्ण ने नंद बाबा सहित अपने गांव वासियों को समझाया कि इंद्रदेव कि नहीं हमें गोवर्धन पर्वत का स्वागत पूजा-अर्चना बड़े भक्ति भाव से करना चाहिए। कृष्ण की बात मानकर सभी गांव वासियों और नंदबाबा भी बड़े हर्षित हो उठे। और उसके साथ गोवर्धन पर्वत की पूजा की। यह देखकर इंद्रदेव उनसे रूठ गए और गोकुल में आंधी तूफान शुरू कर दिया। सभी ग्रामवासी रोने लगे और उन्हें लगा कि हमारे जीवन खतरे में है। सभी ग्रामवासी पूरी तरह से घबरा गए। ऐसे समय पर बाल कृष्ण ने महान गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी सी उंगली पर उठा लिया और सभी गोकुलवासियों को उस पर्वत के नीचे जीवन दान दिया। फिर इंद्रदेव से युद्ध भी किया और उनका भी घमंड तोड़ दिया। उन्हें एहसास हुआ कि जिस जलवायु के लिए हम अपने आप को महान समझते थे। वह गलत है तभी से गोवर्धन की पर्वत की पूजा बड़े धूमधाम से मनाई जाती है। मंदिरों में भंडारा होता है। गोवर्धन को लोग गोबर से मंदिरों में पर्वत के रुप में मनाते हैं। उनकी पूजा करते हैं। इस दिन हम कृष्ण और गोवर्धन की पूजा करते हैं और गोवर्धन पर्वत की भी पूजा बड़े भाव से होती है।

गोवर्धन पूजा की विधी (govardhan puja ki vidhi)

गोवर्धन की पूजा किसान करते हैं किसान खेतों से शुद्ध मिट्टी अथवा गाय का गोबर और 56 प्रकार का भोजन बनाकर उनकी पूजा करते हैं। गाय के गोबर से घर के मुख्य द्वार के आंगन में गोवर्धन बनाया जाता है फिर उन्हें नवेद चढ़ाकर गोवर्धन की पूजा की जाती है।

विधि (vidhi)

सुबह जल्दी उठकर हम स्नान करके शुद्ध होकर साफ सुथरे कपड़े पहन कर अपनर घर में पकवान बनाते हैं। खेत में भी गोबर से भगवान गोवर्धन की प्रतिमा बनाई जाती है। साथ ही खेत में भी पूजा की जाती है। जितना संभव हो उतना बनाकर आप गोवर्धन पूजा में शामिल हो सकते हैं। गोवर्धन पर्वत की पूजा प्रकृति की पूजा है। हमें सब कुछ प्रकृति से मिलता है। इन्हें हमें हमेशा ही धन्यवाद करना चाहिए।

गोवर्धन पूजा पौराणिक पूजा है। यह पूजा दिवाली के अगले दिन हम करते हैं जिसकी जैसी श्रद्धा है उसी भाव से की जाती है। गोवर्धन पर्वत अभी भी मौजूद है। वहां पर अभी भी सब जाते हैं उनकी परिक्रमा करते हैं। उनका दर्शन करते हैं। पर्वत के आकार का बहुत बड़ा महत्व है। लोग अपनी कामना लेकर जाते हैं सभी की कामना गोवर्धन भगवान पूर्ण करते हैं। यही इनकी कथा है। इसी प्रकार इनका पूजन होता है और यह इनका महत्व गाय माता की पूजा पर निर्भर है। गोवर्धन पूजा बड़ी पूजा है हमें प्रकृति से मिलाती है।

धनतेरस 2017- लक्ष्मी का है आगमन dhanteras 2017-laxmi ka hai aagman

धनतेरस 2017- लक्ष्मी का है आगमन (dhanteras 2017-laxmi ka hai aagman)

हिंदू प्राचीन कथाओं के अनुसार धनतेरस पर सूर्य अस्त होने पर यानी कि प्रदोष काल में पूजा करनी चाहिए। धनतेरस के दिन की पूजा का जो सबसे अच्छा मुहूर्त है उसी में पूजा करनी चाहिए। पौराणिक कथाओं के अनुसार, हमें लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में ही करनी चाहिए। क्या आप जानते हैं कि धनतेरस को धनवंतरी त्रयोदशी भी कहते हैं। धनतेरस पूजा को धनवंतरी त्रियोदशी, धनवंतरी जयंती पूजा, यमद्वीप और धनत्रयोदशी इन सब रूपों में इसे पूजा जाता है।

धनतेरस 2017( dhanteras 2017)

यह धनतेरस को पूरे भारत में आस्था के साथ मनाया जाता है। और 2017 में इसे भारत और दूसरे देशों में भी 17 अक्टूबर मंगलवार को मनाया जाएगा।

धनतेरस क्या है (dhanteras kya hai)

धनतेरस पूरे भारत के साथ-साथ दूसरे देशों में भी 5 दिन लंबे दिवाली समारोह के पहले दिन का त्यौहार है।

धनतेरस का अर्थ है (dhanteras ka arth kya hai)

हिंदू चंद कैलेंडर के अनुसार कार्तिक के महीने में 13 दिन धन की पूजा की जाती है। इसे ही धनतेरस कहा जाता है। इस दिन धन के लक्ष्मी की पूजा होती है और इस दिन नई नई वस्तुएं खरीदी जाती है। क्योंकि हिंदू परंपरा के अनुसार माना जाता है कि नई वस्तु खरीदने से घर में लक्ष्मी आती है।

धनतेरस कैसे मनाया जाता है( dhanteras kaise mnaya jaata hai)

धनतेरस पर लोग अपने घरों की साफ सफाई करते हैं। अपने अपने घरों को अच्छी तरह से सजाते हैं। मिट्टी के दिए जलाते हैं और कई परंपराओं का पालन करते हैं। देवी लक्ष्मी के पैरों को लाकर अपने घरों में लगाते हैं
बने बनाए पैर भी मार्केट में मिलते हैं। जिसे घर में चिपकाए जाते हैं। फिर सूर्यास्त के बाद गणेश और लक्ष्मी की पूजा करते हैं। गुलाब और गेंदे के फूल की माला लाते हैं। पूजा के लिए मिठाई, देसी घी का दीपक, धूप, अगरबत्ती यह सब का इस्तेमाल किया जाता हैं।इन सब से घर मे पूजा करने से समृद्धि और अच्छे के लिए पूजा होती हैं। लोग देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की मन वह मन में उच्चारण भक्ति, गीत, आरती बड़े भाव के साथ गाते हैं। नए कपड़े और गहने औरतें पहनती हैं। यह सब अपने घर की खुशहाली के लिए किया जाता है।

धनतेरस की कहानियां और किवदंतियां (dhanteras ki kahaniyan)

धनतेरस की खुशी इसलिए मनाई जाती है क्योंकि ये राजा हिमा के 16 साल के बेटे की कहानी पर आधारित है। राजा के बेटे के बारे में ऐसी भविष्यवाणी हुई थी, कि उसकी मृत्यु शादी के चौथे दिन ही हो जाएगी। सांप के काटने की वजह से ऐसा होगा। उसकी पत्नी बहुत ही समझदार और चालाक थी। उसने अपने पति का जीवन बचाने का रास्ता सोच लिया था। उस दिन अपने पति को उस ने सोने नहीं दिया था। उसने अपने सोने चांदी के आभूषणों को इकट्ठा किए। अपने सोने वाले कमरे मे इन सब का ढेर लगा दिया और अपने शयनकक्ष में ढेर सारे दिए जला दिए। उसने ऐसा इसलिए किया था कि उसका पति जागता रहे। मृत्यु के देवता यम सांप के रूप में पहुंचे तो गहने और दिए की रोशनी से उनकी आंखे चौंधिया गई। वह कमरे में घुस नहीं पाए। फिर उन्होंने सिक्के के ऊपर से कूद के जाना चाहा, तो राजकुमार की पत्नी की मधुर गीत सुनते सुनते ही रात बीत गई। धीरे धीरे सुबह हो गई और वह बिना राजकुमार को लिए ही वापस चले गए। इस तरह अपने पति की रक्षा की। उस दिन से यह दिन धनतेरस के रूप में ये पर्व मनाया जाता है।

धनतेरस परंपराएं (dhanteras pramprayen)

धनतेरस की कई परंपरा है। अलग-अलग देशों में अलग-अलग परंपराएं हैं। नए बर्तन, सोने के आभूषण, चांदी के सिक्के, कैलेंडर, नई चीजें खरीदने से नया विचार मन में आता है। लोगों का मानना है कि नई चीजें लाने से साल भर हम नए विचारों को सोचते रहेंगे। घर में नई चीजें के आने का मतलब साल भर हमारे घर में लक्ष्मी लाने की पहचान है। लक्ष्मी की पूजा शाम को की जाती है। अलग-अलग रीती रिवाज है। जैसे कि दक्षिण भारत में गायों की पूजा की जाती है। क्योंकि गाय में लक्ष्मी का वास होता है। इसलिए यह धनतेरस का त्यौहार मनाया जाता है। हम इस तरह का खुशी और उल्लास से मनाते हैं। हमें बहुत खुशी मिलती है। यह हमारे त्योहार बुराइयों को छोड़कर अच्छाई और हमें ले जाता है।

ये सब रिवाज है धनतेरस मनाने के पीछे। इस दिन देवी लक्ष्मी का अहम पूजा होती है।

आती हे दीवाली से एक दिन पहेले करती हे पैसो की बारिश कहते हे हम इसको धनतेरस ये तो हे बड़ी सुहानी बड़ी मस्त..

हॅपी धनतेरस.. (happy dhanteras)

Diwali information in hindi

दीपावली-दीयों का पर्व

भारत पर्व का देश माना जाता है। यहां पर हर होने वाले पर्व पर आपको खुशियां, सुख, शांति और एकता मिलेगी। यह हमारे सांस्कृतिक, परंपरा, सामर्थ्य, सामाजिकता और एकता की कड़ी को जोड़े रखता है। हर एक पर्व का अपना अलग ही महत्व है। परंतु हर एक पर्व हमारी जिंदगी में खुशियां भर देता है। हर एक पर्व के पीछे कोई ना कोई सामाजिक परंपरा या सांस्कृतिक या किसी भी तरह की कथाएं जरुर जुड़ी रहती है। जिससे हमें नया कुछ सीखने को मिलता है।

आज हम जगमगाते दीपों का त्योहार यानी की दीवाली की बात करने जा रहे हैं। जैसे ही यह पर्व आता है उससे पहले ही लोगों के मकान, दुकानें और घरों की सफाई चालू हो जाती है। इस पर्व के आने से लोगों के दिलों में और उनके जिंदगी में एक जोश आ जाता है। एक खुशी की लहर दौड़ने लगती है।

नामकरण- दीपावली दो शब्दों को मिलाकर बना है दीप + अवली। जिसका मतलब होता है दीपों की पंक्ति। इस पर्व पर हर घर में दिए जरूर जलाए जाते हैं। इसी वजह से इसका नाम दीपावली पड़ा।

दीवाली से सम्बद्ध कहानियां-

इस पर्व के साथ अलग-अलग धर्म की अलग-अलग कथाएं जुड़ी हुई है। पर इन सब कथाओं में से सबसे प्रमुख कथा, प्रभु राम की मानी जाती है। क्योंकि इस दिन श्री रामचंद्र जी अत्याचारी रावण को उसके पापी शरीर से मुक्ति दिला कर अयोध्या वापस लौटे थे, और जब वह अयोध्या वापस आए तो उनका राज्य पूरा हर्षित हो गया। क्योंकि वह सबके प्रिय राजा थे। उनके वापस आने की खुशी में लोगों ने दीपों से अपने घर को जगमग कर दिया। तब से यह त्यौहार इसी तरह से मनाया जाने लगा।

यह तो थे राम भक्त के लोगों की कहानी। परंतु कृष्ण भक्ति के लोग इसलिए इस त्योहार को मनाते हैं क्योंकि इसी दिन कृष्ण ने नरकासुर को मारा था और उसके चंगुल से कम से कम 16000 रमणियों को आजादी दिलवाई थी। क्योंकि यह शासक बहुत ही अत्याचारी था, इसलिए इसके मरने की खुशी में लोगों का मन मोर की तरह नाचने लगा और उन्होंने खुशी में अपने घर में दीपक जलाए।

इसके पीछे एक और कथा है। इसी दिन समुद्र मंथन भी हुआ था और समुद्र मंथन होने पर लक्ष्मी जी प्रकट हुई थी। उनके प्रकट होने पर देवताओं ने उनकी पूजा की थी।

वहीं कुछ भक्त यह भी मानते हैं कि इस दिन यानी कि धनतेरस के दिन भगवान विष्णु ने नरसिंह का रूप धरा था और अपने भक्त प्रहलाद को हिरणाकश्यप से छुटकारा दिलाया था।

वहीं सिख धर्म के लोगों की अलग मान्यता है। उनका कहना है कि इसी दिन उनके छठे गुरु हरगोविंद सिंह जी को जेल से रिहाई मिली थी। इसलिए सिख लोग भी इस पर्व को बहुत धूमधाम से मनाते हैं। इसके इलावा कुछ लोग यह भी मानते हैं महर्षि दयानंद को भी इसी दिन स्वर्ग प्राप्त हुआ था।

इस पर्व के साथ बहुत सारी कहानियां जुड़ी हुई है। जितनी भी कहानी आप सुनेंगे वह सब कम है परंतु प्रमुख कहानियां यही है।

पर्व का आयोजन- दीपावली का त्योहार जैसे ही आता है। उसके आगे पीछे त्योहारों की लड़ी लग जाती है। दीपावली से 2 दिन पहले त्रयोदशी को धनतेरस मनाते हैं। धनतेरस पर लोग नए बर्तन खरीदते हैं। चतुर्दशी को नरक चौदस मनाया जाता है। अमावस्या को दीपावली मनाई जाती है। दीपावली से अगले दिन लोग गोवर्धन पूजा के लिए जाते हैं। क्योंकि माना जाता है कि इस दिन कृष्ण जी ने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली से उठाकर गोकुल धाम वासियों की इंद्र के प्रकोप से रक्षा की थी। उस के दूसरे दिन भैया दूज मनाया जाता है।

महत्त्व- इस त्यौहार को छोटे-बड़े, गरीब-अमीर हर तरह की जाती, हर तरह के लोग मनाते हैं। अगर आप बाजारों में जाएंगे तो पूरी बाजार दुल्हन की तरह सजी दिखाई देती है। रंग बिरंगे खिलौने, रंग बिरंगे फूल, पुष्पमालाएं, रंग बिरंगी मिठाईयां देखने को मिलते हैं। वही बालक इस पर्व को लेकर अति उत्साहित रहते हैं और उनका उत्साह पटाखों के जरिए हम देख सकते हैं। सबसे बेहतरीन दृश्य होता है दीवाली की रात का, इस दिन सभी घर ऐसे लगते हैं जैसे शादी वाले घर हैं।

इन सबके अलावा दीपावली व्यापारियों के लिए भी बहुत ही महत्वपूर्ण और शुभ दिन माना जाता है। इस दिन व्यापारी अपने पुराने बही खाता बंद करते हैं और नए तरीके से व्यापार आरंभ करते हैं। सभी धर्म और जाति के लोग इस पर्व को अति उत्साह से मनाते हैं। दिवाली पर सफाई होने के पीछे कारण यह भी है कि दिवाली से पहले वर्षा ऋतु होती है, जिसकी वजह से घर में दुर्गंध आ जाती है और सफाई हो जाने के बाद दिवाली वाले दिन पूरा घर सुगंधित हो उठता है।

दिवाली जैसे उत्साह वाले दिन दुख तब होता है, जब इस दिन लोग इस त्योहार को गलत तरीके से मनाते हैं। कहने का भाव है कि कुछ लोग इस दिन जुआ खेलते हैं, शराब पीते हैं जो कि बिल्कुल ही गलत आदत है। इस दिन हमें नास्तिक,अराष्ट्रीयता और नकरात्मक चीजों का त्याग कर देना चाहिए।

उपसंहार-

दिवाली भारत का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है। इसके महत्व को हमें गलत रूप में नहीं लेकर जाना चाहिए। इसके महत्व को हम समझे। जुआ खेलकर और शराब पीकर इस पर्व को ना मनाए। इस त्यौहार को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाएं। त्योहारों की वजह से ही देश में एकता होती है। इसलिए महत्वता को समझने की कोशिश करें और इसके सभी नियमों का पालन करें। इस महान पर्व पर बुराई करने वालों का विरोध करें और खुद बुराइयों से बचे।