दशहरे के त्योहार का महत्व

दशहरे का त्योहार हिंदुओं में मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहारों में से एक है। दशहरे का त्योहार बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। पूरे देश में पूरी श्रद्धा व हर्ष उल्लास के साथ यह त्योहार मनाया जाता है, तथा जगह-जगह मेलों का आयोजन किया जाता है। इस दिन रावण की प्रतिमा बनाकर राम के द्वारा रावण दहन किया जाता है व मेलों में रामलीला का आयोजन कर हिंदू संस्कृति की इस पवित्र गाथा को पेश किया जाता है जो अत्यंत मनमोहक होती है। बच्चे-बड़े सभी प्रेमपूर्वक मिलकर ढेर सारी मिठाइयों और खिलौनों के साथ इस पर्व का आनंद उठाते हैं।

दशहरे का महत्व

दशहरे का त्योहार आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाया जाता है, जिसे पुरे देश में विजयादशमी के रूप में जाना जाता है। यह त्योहार दीपावली से लगभग 20 दिन पहले आता है। हिंदू पुराणों में इस त्योहार को मनाए जाने के पीछे दो मान्यताएं प्रसिद्ध है। पहली- इस दिन भगवान राम ने रावण के अत्याचारों से लोगों को मुक्त कराने व उसके पापों का अंत करने के लिए 9 दिनों तक रावण के साथ युद्ध किया था राम ने रावण का वध दशहरे वाले दिन ही किया था इसीलिए इस त्योहार को बुराई पर अच्छाई की विजय के रूप में विजयादशमी के रूप में मनाया जाता है। और दूसरी मान्यता है कि इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का संघार किया था इसीलिए इस दिन मां दुर्गा की पूजा की जाती है। यह भी मान्यता है कि भगवान राम ने रावण का वध करने से पूर्व मां दुर्गा की आराधना की थी, मां दुर्गा ने भगवान राम की पूजा से प्रसन्न होकर उन्हें विजय का वरदान दिया था। देश के अलग-अलग राज्यों में इस त्योहार को अलग अलग ढंग से मनाया जाता है, पश्चिम बंगाल में यह त्योहार दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाता है तो उत्तर भारत में विजयादशमी के रूप में।

हिंदू पंचांग के अनुसार 3 तिथियां शुभ मानी जाती है- चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, अश्विन शुक्ल प्रतिपदा और कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा, जिनमें से एक तिथि आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को विजय दशमी का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन लोग शस्त्रों की पूजा भी करते हैं।दशहरे का दिन नया व्यवसाय या नया कार्य करने के लिए अत्यंत अशुभ माना जाता है। इस दिन बिना मुहूर्त के कोई भी कार्य प्रारम्भ किया जा सकता है। दशहरे का त्योहार भगवान राम की विजय के रूप में मनाया जाय या दुर्गा पूजा के रूप में, दोनों ही रूपों में यह त्योहार शक्ति पूजा का प्रतीक है, शस्त्र पूजन की तिथि है, हर्ष उल्लास तथा विजय का पर्व है तथा भारतीय संस्कृति की वीरता का प्रतीक है।

दशहरे से लें सीख

दशहरे का त्योहार 10 प्रकार के पापों को त्याग करने की प्रेरणा देता है। यह 10 पाप हैंं- काम, क्रोध, मोह, लोभ,मत्सर, अहंकार, मद, आलस्य, चोरी व हिंसा। इस त्योहार से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए कि हमेशा असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की विजय होती है। अहंकारी व्यक्ति का हमेशा सर्वनाश होता है, रावण अत्यंत विद्वान और ज्ञानी व्यक्ति था परंतु उसका अहंकार ही उसके विनाश का कारण बना। भारतीय संस्कृति विविधता और सौर्य का प्रतीक है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति के रूधिर में वीरता का प्रादुर्भाव पैदा करने के लिए दशहरे का उत्सव मनाया जाता है।

विजयादशमी पूजन विधि

दशहरे के दिन घर के सभी सदस्यों को नित्य कर्म से निवृत्त होकर व स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए तथा गाय का गोबर लेकर 4 गोले (उपले) बनाने चाहिए, इन्हें श्रीराम सहित अन्य तीनों भाइयों की प्रतिमा के रूप में मानना चाहिए। गाय के गोबर से ही चार कटोरी के आकार के बर्तन बना कर उनमें भीगे हुए धान और चांदी का सिक्का डालकर कपड़े से ढक कर रख देना चाहिए, उसके बाद धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्प, गंध और द्रव्य आदि से पूजा कर गरीबों को भोजन कराना चाहिए। इस दिन भगवान राम के साथ लक्ष्मण भरत और शत्रुघ्न की भी पूजा करनी चाहिए।
इस वर्ष दशहरा 30 दिसंबर 2017 को मनाया जाएगा इस दिन विजय दशमी विजय मुहूर्त दोपहर 2:08 से 2:55 तक रहेगा।