दीपावली-दीयों का पर्व

भारत पर्व का देश माना जाता है। यहां पर हर होने वाले पर्व पर आपको खुशियां, सुख, शांति और एकता मिलेगी। यह हमारे सांस्कृतिक, परंपरा, सामर्थ्य, सामाजिकता और एकता की कड़ी को जोड़े रखता है। हर एक पर्व का अपना अलग ही महत्व है। परंतु हर एक पर्व हमारी जिंदगी में खुशियां भर देता है। हर एक पर्व के पीछे कोई ना कोई सामाजिक परंपरा या सांस्कृतिक या किसी भी तरह की कथाएं जरुर जुड़ी रहती है। जिससे हमें नया कुछ सीखने को मिलता है।

आज हम जगमगाते दीपों का त्योहार यानी की दीवाली की बात करने जा रहे हैं। जैसे ही यह पर्व आता है उससे पहले ही लोगों के मकान, दुकानें और घरों की सफाई चालू हो जाती है। इस पर्व के आने से लोगों के दिलों में और उनके जिंदगी में एक जोश आ जाता है। एक खुशी की लहर दौड़ने लगती है।

नामकरण- दीपावली दो शब्दों को मिलाकर बना है दीप + अवली। जिसका मतलब होता है दीपों की पंक्ति। इस पर्व पर हर घर में दिए जरूर जलाए जाते हैं। इसी वजह से इसका नाम दीपावली पड़ा।

दीवाली से सम्बद्ध कहानियां-

इस पर्व के साथ अलग-अलग धर्म की अलग-अलग कथाएं जुड़ी हुई है। पर इन सब कथाओं में से सबसे प्रमुख कथा, प्रभु राम की मानी जाती है। क्योंकि इस दिन श्री रामचंद्र जी अत्याचारी रावण को उसके पापी शरीर से मुक्ति दिला कर अयोध्या वापस लौटे थे, और जब वह अयोध्या वापस आए तो उनका राज्य पूरा हर्षित हो गया। क्योंकि वह सबके प्रिय राजा थे। उनके वापस आने की खुशी में लोगों ने दीपों से अपने घर को जगमग कर दिया। तब से यह त्यौहार इसी तरह से मनाया जाने लगा।

यह तो थे राम भक्त के लोगों की कहानी। परंतु कृष्ण भक्ति के लोग इसलिए इस त्योहार को मनाते हैं क्योंकि इसी दिन कृष्ण ने नरकासुर को मारा था और उसके चंगुल से कम से कम 16000 रमणियों को आजादी दिलवाई थी। क्योंकि यह शासक बहुत ही अत्याचारी था, इसलिए इसके मरने की खुशी में लोगों का मन मोर की तरह नाचने लगा और उन्होंने खुशी में अपने घर में दीपक जलाए।

इसके पीछे एक और कथा है। इसी दिन समुद्र मंथन भी हुआ था और समुद्र मंथन होने पर लक्ष्मी जी प्रकट हुई थी। उनके प्रकट होने पर देवताओं ने उनकी पूजा की थी।

वहीं कुछ भक्त यह भी मानते हैं कि इस दिन यानी कि धनतेरस के दिन भगवान विष्णु ने नरसिंह का रूप धरा था और अपने भक्त प्रहलाद को हिरणाकश्यप से छुटकारा दिलाया था।

वहीं सिख धर्म के लोगों की अलग मान्यता है। उनका कहना है कि इसी दिन उनके छठे गुरु हरगोविंद सिंह जी को जेल से रिहाई मिली थी। इसलिए सिख लोग भी इस पर्व को बहुत धूमधाम से मनाते हैं। इसके इलावा कुछ लोग यह भी मानते हैं महर्षि दयानंद को भी इसी दिन स्वर्ग प्राप्त हुआ था।

इस पर्व के साथ बहुत सारी कहानियां जुड़ी हुई है। जितनी भी कहानी आप सुनेंगे वह सब कम है परंतु प्रमुख कहानियां यही है।

पर्व का आयोजन- दीपावली का त्योहार जैसे ही आता है। उसके आगे पीछे त्योहारों की लड़ी लग जाती है। दीपावली से 2 दिन पहले त्रयोदशी को धनतेरस मनाते हैं। धनतेरस पर लोग नए बर्तन खरीदते हैं। चतुर्दशी को नरक चौदस मनाया जाता है। अमावस्या को दीपावली मनाई जाती है। दीपावली से अगले दिन लोग गोवर्धन पूजा के लिए जाते हैं। क्योंकि माना जाता है कि इस दिन कृष्ण जी ने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली से उठाकर गोकुल धाम वासियों की इंद्र के प्रकोप से रक्षा की थी। उस के दूसरे दिन भैया दूज मनाया जाता है।

महत्त्व- इस त्यौहार को छोटे-बड़े, गरीब-अमीर हर तरह की जाती, हर तरह के लोग मनाते हैं। अगर आप बाजारों में जाएंगे तो पूरी बाजार दुल्हन की तरह सजी दिखाई देती है। रंग बिरंगे खिलौने, रंग बिरंगे फूल, पुष्पमालाएं, रंग बिरंगी मिठाईयां देखने को मिलते हैं। वही बालक इस पर्व को लेकर अति उत्साहित रहते हैं और उनका उत्साह पटाखों के जरिए हम देख सकते हैं। सबसे बेहतरीन दृश्य होता है दीवाली की रात का, इस दिन सभी घर ऐसे लगते हैं जैसे शादी वाले घर हैं।

इन सबके अलावा दीपावली व्यापारियों के लिए भी बहुत ही महत्वपूर्ण और शुभ दिन माना जाता है। इस दिन व्यापारी अपने पुराने बही खाता बंद करते हैं और नए तरीके से व्यापार आरंभ करते हैं। सभी धर्म और जाति के लोग इस पर्व को अति उत्साह से मनाते हैं। दिवाली पर सफाई होने के पीछे कारण यह भी है कि दिवाली से पहले वर्षा ऋतु होती है, जिसकी वजह से घर में दुर्गंध आ जाती है और सफाई हो जाने के बाद दिवाली वाले दिन पूरा घर सुगंधित हो उठता है।

दिवाली जैसे उत्साह वाले दिन दुख तब होता है, जब इस दिन लोग इस त्योहार को गलत तरीके से मनाते हैं। कहने का भाव है कि कुछ लोग इस दिन जुआ खेलते हैं, शराब पीते हैं जो कि बिल्कुल ही गलत आदत है। इस दिन हमें नास्तिक,अराष्ट्रीयता और नकरात्मक चीजों का त्याग कर देना चाहिए।

उपसंहार-

दिवाली भारत का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है। इसके महत्व को हमें गलत रूप में नहीं लेकर जाना चाहिए। इसके महत्व को हम समझे। जुआ खेलकर और शराब पीकर इस पर्व को ना मनाए। इस त्यौहार को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाएं। त्योहारों की वजह से ही देश में एकता होती है। इसलिए महत्वता को समझने की कोशिश करें और इसके सभी नियमों का पालन करें। इस महान पर्व पर बुराई करने वालों का विरोध करें और खुद बुराइयों से बचे।