किसान क्रेडिट कार्ड योजना की जानकारी

किसान क्रेडिट कार्ड योजना की जानकारी  ( Kisan Credit Card Scheme ki jankari  )

किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड योजना ( Kisan Credit Card Scheme ) शुरू हुई है जो कि उनके लिए बहुत बड़ी जरूरत बन सकती है। अगर यह क्रेडिट कार्ड उनके पास आ जाता है तो वह आसानी से कोई भी कर्जा ले सकते हैं। इसलिए यह योजना उनके लिए बहुत ही अच्छी है। इस क्रेडिट कार्ड की मदद से उन्हें खेती के लिए आसानी से खर्चा मिल जाएगा जिससे वह लोग समय से पहले ही किसान खेती के लिए उपकरण बीज और जो भी उस से संबंधित चीजे हैं वह खरीद सकते हैं।

Kisan Credit Card Scheme
Kisan Credit Card Scheme

क्या हैं किसान क्रेडिट कार्ड ? ( Kya hai kisan credit card )

यह किसान क्रेडिट कार्ड एक तरह से उनके लिए उनके लिए पहचान पत्र है। अगर यह क्रेडिट कार्ड उनके पास आ जाता है तो वह आसानी से खेती के लिए कर्जा ले सकते हैं। और अपनी कृषि से संबंधित गतिविधियों को आसानी सुचारु रुप से चला सकते हैं। इस क्रेडिट कार्ड के अंदर उनका नाम, जमीन की जानकारी, पता, सुधार की अवधि, वैलिडिटी पीरियड और किसान का पासपोर्ट साइज फोटो इकट्ठा किया जाएगा।

किसान क्रेडिट कार्ड का इतिहास ( Kisan Credit Card ka itihas )

किसान क्रेडिट कार्ड आज से नहीं बल्कि 1998-99 में वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने आरंभ किया था। उन्होंने कहा था कि किसान क्रेडिट कार्ड योजना के चलते बैंक किसानों को एक तरह से गोद लेगी जिससे किसान हमारे भारत देश को बेहतरीन बीज खाद और कीटनाशक खरीद के अच्छी फसल दे सके। इसलिए नाबार्ड प्रमुख बैंको के साथ विचार विमर्श किया गया और उसके बाद एक आदर्श प्रेस किसान क्रेडिट कार्ड योजना आरंभ की गई और यह स्कीम रिजर्व बैंक के साथ आरंभ की गई थी।

किसान क्रेडिट कार्ड के फायदे ( Kisan Credit Card ke fayde )

किसान क्रेडिट कार्ड का फायदा उठाने के लिए ज्यादा पढ़ाई लिखाई की जरूरत नहीं है और इसे कम पढ़े लिखे लोग भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इस योजना के चलते किसान को हर साल लोन लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसलिए यह योजना किसानों का समय और तनाव दोनों से बचाएगी। इसमें किसान को ब्याज क्रेडिट कार्ड पर मिल जाता है इसलिए किसान बिना किसी मुश्किल के अपने खेत के लिए बीज, खाद और भी अन्य जरूरत की चीजें खरीद कर एक अच्छी फसल तैयार कर सकता है। अगर कर लिया है तो उसको चुकाना भी पड़ेगा। परंतु इसके लिए किसान को चिंता करने की जरूरत नहीं है जब उन की फसल बिक जाए उसके बाद ही वह इस कर्ज को अदा कर सकते हैं।

किसान क्रेडिट कार्ड के लिए योग्यता ( Kisan Credit Card ke liye yogyta )

किसान क्रेडिट कार्ड उन्हीं किसानों को मिलता है जिनके पास खुद के खेत होते हैं या फिर किसी के खेती में वह काम करते हैं या फिर उनके पास फसल उत्पादन के लिए बहुत सारे खेत होते हैं। इस लोन को एक किसान भी ले सकता है और समूह किसान भी ले सकता है। परंतु जरूरी बात यह है कि इस क्रेडिट कार्ड को हासिल करने के लिए किसान को बैंक के ऑपरेशन एरिया में सम्मिलित होना जरूरी है।

अब आपको बताते हैं कि किसान क्रेडिट कार्ड में किन-किन चीजों के लिए कर्ज ले सकता है। वह अपनी खेती के लिए, फसल की कटाई के लिए, अगर उसने पशु पालन किया है तो उनके लिए भी ले सकता है। कृषि संबंधित कई तरह की गतिविधियां होती हैं उनके लिए भी वह लोन ले सकता है। घर की आवश्यकताओं के लिए भी वह लोन ले सकता है। इन सब चीजों के लिए बैंक किसान क्रेडिट कार्ड पर लघु कर्ज देती है।

किसान क्रेडिट कार्ड तकनीकी सुविधा : ( kisan credit card takniki suvidha )

पर्याप्त सिंचाई की सुविधाओं,मिट्टी, जलवायु की उपयुक्तता,भण्डार की सुविधा,उत्पादन की उपयुक्ता, चित्राशी हमें कितनी मिलेगी यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। कर्ज की राशि किस तरह से आपकी कृषि हो रही है, आप किस तरह की जमीन पर कृषि कर रहे हैं, इससे पहले आपको कितना कृषि उत्पादन मिला है। इन सब को देखते हुए मिलेगी।

किसान क्रेडिट कार्ड के अंतर्गत लोन सुविधा ( Kisan Credit Card e antargat loan ki suvidha )

पहले साल किसान के क्रेडिट कार्ड पर शॉर्ट-टर्म क्रेडिट कार्ड लिमिट फिक्स कर दी गई है। उसके अनुसार फसलों की खेती और उससे उत्पन्न होने वाली फसल पर यह सब निर्भर करता है। अगर यह सब बेहतरीन तरीके से रहा तो अगले साल हर एक साल के एक से पांच में लोन 10% बढ़ा दिया जाता है और जो लिमिट शॉर्ट टर्म के लिए दी गई थी उसे हर पांचवें साल पर 150% बढ़ा दिया जाता है।
इस तरह की बहुत सारी प्रक्रिया किसानों के क्रेडिट कार्ड में जोड़ी और घटाई जाती है। इसलिए आजकल किसानों के लिए यह क्रेडिट कार्ड बहुत ही जरूरी है क्योंकि प्राकृतिक आपदा की वजह से किसानों की फसलों का बहुत नुकसान होता है। जिसकी वजह से उनकी पूरी मेहनत पर पानी फिर जाता है। इसलिए यह क्रेडिट कार्ड उन की तकलीफ़ों को कम करने के लिए शुरु किया गया है।

गोवर्धन पूजा कथा विधि महत्व

गोवर्धन पूजा कथा विधि महत्व  ( Govardhan Puja Vidhi,Mahtav )

गोवर्धन पूजा दिवाली के अगले दिन ही होता है इसे अंकुट भी कहते हैं। किसान भाई बड़े भाव से इस पूजा को करते हैं। जलवायु और प्राकृतिक संसाधनों को धन्यवाद देते हैं।

गोवर्धन पूजा का महत्व( Govardhan Puja Ka Mahtav )

गोवर्धन पूजा का महत्व है कि हमारा जीवन प्रकृति की हर एक चीज पर ही निर्भर है जैसे कि पेड़,पौधे, पशु, पंछी,नदी, पर्वत उन पर ही निर्भर है। इसलिए हमें उनका ध्यान देना चाहिए। हमारे भारत देश में जलवायु संतुलन का बहुत बड़ा महत्व है। जलवायु संतुलन का विशेष कारण पर्वत मालाएं एवं नदियां हैं। प्राकृतिक धन-संपत्ति के प्रति हमारी भावना व्यक्त करता है। गोवर्धन के दिन गोवर्धन पर्वत की पूजा बड़े श्रद्धा भाव से की जाती है। यह गोवर्धन पूजा दिवाली के दूसरे दिन होती है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाई जाती है। इस गोवर्धन पूजा में गाय माता की पूजा की जाती है क्योंकि गाय माता के ही दूध की छाछ, दही, मक्खन यहां तक कि गाय का गोबर, गाय का मुत्र भी हमारे जीवन का कल्याण करता है। गाय का गोबर, दूध, मुत्र सब पूजा के काम आता है। गाय हमारे हिंदू धर्म में गंगा नदी के बराबर मानी जाती है। इसे गोवर्धन पूजा के अन्नकुट भी कहते हैं। अंकुट में भंडारा होता है कई जगह तो यह एक पार्टी जैसा भी मनाया जाता है और यह महीनों तक चलता रहता है। यह पूजा बहुत ही अच्छी लगती है।

गोवर्धन पूजा की कथा ( Govardhan Puja Ki Katha )

गोवर्धन पूजा एक पौराणिक कथा है। कहते हैं कि भगवान कृष्ण का जन्म तो गोकुल में हुआ था। गोकुल में जन्म लेने के बाद ग्वाले के बीच में रहकर भगवान कृष्ण ने विशेष लीलाएं करी थी। कई लोगों का घमंड भी तोड़ा था। कईयों का उद्धार भी किया था। उन्हीं लोगों में एक इंद्रदेव भी है। गोकुल के लोग अच्छी फसल अच्छी जलवायु के लिए इंद्र देव का पूजा भी करते थे। गोकुल वासी हर वर्ष नाचते गाते हुए इंद्र देव की पूजा अर्चना करते थे। इस पूजा को जानने के लिए कृष्ण भगवान ने नंद बाबा से पूछा, यह पूजा क्यों आप करते हैं और किसके लिए करते हैं। तब नंदबाबा ने बाल कृष्ण को बताया कि यह पूजा हम इंद्र देव के स्वागत के लिए करते हैं। इस पर बाल कृष्ण ने नंद बाबा सहित अपने गांव वासियों को समझाया कि इंद्रदेव कि नहीं हमें गोवर्धन पर्वत का स्वागत पूजा-अर्चना बड़े भक्ति भाव से करना चाहिए। कृष्ण की बात मानकर सभी गांव वासियों और नंदबाबा भी बड़े हर्षित हो उठे। और उसके साथ गोवर्धन पर्वत की पूजा की। यह देखकर इंद्रदेव उनसे रूठ गए और गोकुल में आंधी तूफान शुरू कर दिया। सभी ग्रामवासी रोने लगे और उन्हें लगा कि हमारे जीवन खतरे में है। सभी ग्रामवासी पूरी तरह से घबरा गए। ऐसे समय पर बाल कृष्ण ने महान गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी सी उंगली पर उठा लिया और सभी गोकुलवासियों को उस पर्वत के नीचे जीवन दान दिया। फिर इंद्रदेव से युद्ध भी किया और उनका भी घमंड तोड़ दिया। उन्हें एहसास हुआ कि जिस जलवायु के लिए हम अपने आप को महान समझते थे। वह गलत है तभी से गोवर्धन की पर्वत की पूजा बड़े धूमधाम से मनाई जाती है। मंदिरों में भंडारा होता है। गोवर्धन को लोग गोबर से मंदिरों में पर्वत के रुप में मनाते हैं। उनकी पूजा करते हैं। इस दिन हम कृष्ण और गोवर्धन की पूजा करते हैं और गोवर्धन पर्वत की भी पूजा बड़े भाव से होती है।

गोवर्धन पूजा की विधी ( Govardhan Puja Ki Vidhi )

गोवर्धन की पूजा किसान करते हैं किसान खेतों से शुद्ध मिट्टी अथवा गाय का गोबर और 56 प्रकार का भोजन बनाकर उनकी पूजा करते हैं। गाय के गोबर से घर के मुख्य द्वार के आंगन में गोवर्धन बनाया जाता है फिर उन्हें नवेद चढ़ाकर गोवर्धन की पूजा की जाती है।

विधि ( vidhi )

सुबह जल्दी उठकर हम स्नान करके शुद्ध होकर साफ सुथरे कपड़े पहन कर अपनर घर में पकवान बनाते हैं। खेत में भी गोबर से भगवान गोवर्धन की प्रतिमा बनाई जाती है। साथ ही खेत में भी पूजा की जाती है। जितना संभव हो उतना बनाकर आप गोवर्धन पूजा में शामिल हो सकते हैं। गोवर्धन पर्वत की पूजा प्रकृति की पूजा है। हमें सब कुछ प्रकृति से मिलता है। इन्हें हमें हमेशा ही धन्यवाद करना चाहिए।

गोवर्धन पूजा पौराणिक पूजा है। यह पूजा दिवाली के अगले दिन हम करते हैं जिसकी जैसी श्रद्धा है उसी भाव से की जाती है। गोवर्धन पर्वत अभी भी मौजूद है। वहां पर अभी भी सब जाते हैं उनकी परिक्रमा करते हैं। उनका दर्शन करते हैं। पर्वत के आकार का बहुत बड़ा महत्व है। लोग अपनी कामना लेकर जाते हैं सभी की कामना गोवर्धन भगवान पूर्ण करते हैं। यही इनकी कथा है। इसी प्रकार इनका पूजन होता है और यह इनका महत्व गाय माता की पूजा पर निर्भर है। गोवर्धन पूजा बड़ी पूजा है हमें प्रकृति से मिलाती है।

लड़की को पटाने के तरीका

लड़की को पटाने के तरीका ( Ladki Patane Ke Tarike )

सबकी जिंदगी में कभी ना कभी ऐसा दिन जरूर आता है जब उसे किसी ऐसी लड़की से प्यार हो जाता है। जिसको वह पहली बार देखता है। वह लड़की के साथ बातचीत बढ़ाने की हर मुमकिन कोशिश करता है। उसका फोन नंबर मांग कर अपने रिलेशन को बढ़ाने की कोशिश करता है। परंतु फोन नंबर मांगने की हिम्मत उसके पास नहीं होती है। क्योंकि उसे ऐसा डर लगता है कि कहीं मेरे नंबर मांगने से वह मुझे थप्पड़ ना मार दे। मुझसे दूर ना चली जाए। ऐसे में कुछ लड़के पीछे हट जाते हैं। तो आज ऐसे ही कुछ टिप्स लेकर हम आपके पास आए हैं, जिसमें हम आपको बताएंगे कि लड़कियों को कैसे पटा सकते हैं(Ladki Patane Ke Tarike  ) या कैसे आप उनको इंप्रेस करें। ताकि वह आपकी भावनाओं की कदर करें और आपसे प्यार करने लगे, तो चलिए पढ़ते हैं उनकीे पसंद के बारे में

लड़की को पटाने के तरीका  ( Ladki Patane Ke Tarike )

1. भरोसेमंद बने  (bharosemand bane)

देखिए सबसे पहले अगर आप किसी के साथ रिश्ता शुरू करने वाले हैं। किसी लड़की को अपने प्यार का एहसास दिलाना चाहते हैं तो उसका भरोसा जीतना बहुत ही जरूरी है। क्योंकि उसी पर रिश्ता टीका रहता है। उसको भरोसा होगा तभी वह आपका अपना फोन नंबर देगी। आप उसे इस बात का भरोसा दिलाए कि आप उसका नंबर अपने दोस्तों को या फिर किसी और को नहीं देंगे।

2. उस से कोंटेक्ट में रहे ( usse contact me rahe )

लड़की से नंबर लेने के बाद उसे कहे कि वह उससे संपर्क में रहे और जब आप यह देखें कि उसका मूड बहुत ही अच्छा है। तो उसे अपने यह बात जरूर कहें कि क्या मैं आपको कभी कभार फोन कर सकता हूं और इसके अलावा कोई दूसरा शब्द इस्तेमाल ना करें।

3. ज्यादा उत्साह न दिखाएं  ( jyada utsah na dikhayen )

अगर लड़की ने आपको अपना नंबर दे दिया है, तो उसमें ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है। और ना ही ज्यादा उतावलापन दिखाने की जरूरत है। क्योंकि लड़कियों को ऐसे लड़के बिल्कुल भी नहीं पसंद जो उसके आगे पीछे मंडराते रहे।

4. जो भी बताएं सच बताएं ( jo bhi btaye sach btaye )

अगर आप लड़की से फोन नंबर मांग रहे हैं। और किसी झूठ का सहारा ले रहे हैं। तो आप सबसे बड़ी गलती कर रहे हैं क्योंकि लड़की झूठ को फट से भांप लेती है इसलिए जो भी बताएं सब साफ-साफ और सच में बताए।

5. दोस्‍तों की मदद न लें अपने दम पर करें (doston ki madad n le apne dam par sab karen )

कुछ लड़के ऐसे होते हैं जो अपने दोस्त को हर बात पर आगे कर देते हैं। अपने दोस्त से कहते हैं कि वह लड़की का नंबर लेकर आए। जो कि लड़कियों को बिल्कुल भी नहीं पसंद हैं। उन्हें लगता है कि लड़के में खुद हिम्मत होनी चाहिए एक लड़की का नंबर मांगने की।

6. लड़की को थोड़ा समय दें  ( ladki ko thoda samay de )

अगर आप चाहते हैं कि आपका रिश्ता लंबा चले तो बेहतर है कि आप लड़की को थोड़ा समय दें, सिर्फ नंबर मांग लेने से ऐसा नहीं समझे कि वह आप से पट गई है बल्कि उस को समझें और अपने दिल की बात भी अच्छे से समझाइए।

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सुकन्या समृद्धि योजना

बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ सुकन्या समृद्धि योजना ( Beti Padhao Beti Bachao Sukanya Samriddhi Yojna )

Sukanya Samriddhi Yojnaजैसा कि हम सब जानते हैं कि आजकल के जमाने में लड़कियों की संख्या कम होती जा रही है। क्योंकि लड़कियों को गर्भ में ही मार दिया जाता है। बस इसी महिलाओं के स्वास्थ्य सुविधा के लिए सरकार द्वारा कई योजना बनाई जा रही है। लड़कियों को शिक्षित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा समृद्धि योजना की शुरुआत की गई है। और भी अन्य जरूरतों के लिए सरकार के द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रहे हैं। सुकन्या समृद्धि ( Sukanya Samriddhi Yojna ) यह जो योजना है बेटियों की पढ़ाई और उनके शादी के खर्चे के लिए बनाई गई है। जिससे की बेटियों के मां बाप उनकी शादी का खर्चा आसानी से उठा सके।

यह योजना के अंतर्गत सभी बेटियों की पढ़ाई और उनकी शादी के लिए डाक विभाग के पास सुकन्या समृद्धि योजना का अकाउंट खुलवाया जा सकता है। डाक विभाग के किसी भी पोस्ट ऑफिस में आप यह अकाउंट खुलवा सकते हैं। सुविधा केंद्र में भी अकाउंट खुलवा सकते हैं। आप डॉक्यूमेंट जमा करने के बाद ही इस अकाउंट को खुलवा पाएंगे।

जानिए क्या है सुकन्या समृद्धि योजना  ( Janiye Kya Hai Sukanya Samriddhi Yojna )

आप अपनी बेटी का सुकन्या समृद्धि योजना जब भी खुलवाने जाएं। उसमें बेटी के नाम से साल में 1000 से लेकर 1,50000 रुपए जमा कर सकते हैं।

यह पैसा आपको 14 साल तक हर साल जमा करवाना होगा। यह खाता बेटी का जब 21 साल पूरे हो जाएंगे तभी आप इसे मैच्योर करवा सकते हैं। और यह पैसा आप 18 साल में भी निकलवा सकते हैं पर यह पैसा उस समय पूरा नहीं निकलेगा बल्कि आधा ही निकलेगा।

सुकन्या समृद्धि योजना के अनुसार यह सुकन्या समृद्धि योजना बेटियों के लिए बहुत लाभदायक योजना है। परंतु अगर आपके बेटी की शादी 18 वर्ष में हो जाती है तो यह योजना बंद हो जाएगी।

अगर आपको पेमेंट लेट हुई तो आपको 50 रूपय पैनल्टी भी भरनी पड़ सकती है। यह खाता पोस्ट ऑफिस में ही नहीं खुलता है बल्कि कई सरकारी व निजी बैंक में भी इस योजना के तहत खाता खुलवा सकते हैं।

अगर आपकी दो बेटियां हैं तो आप अपने दोनों बेटियों के लिए खाता खुलवा सकते हैं। अगर Judwaa है तो उसका प्रूफ आपको दिखाना पड़ेगा, तभी आपका तीसरा खाता खुल पाएगा।

बेटियों के मां बाप कभी भी खाते का ट्रांसफर करवा सकते हैं। मांन लीजिये बेटियों की सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत 2015 में कोई भी व्यक्ति 1000 रुपए महीने में अकाउंट खुलवा सकता है। उसे 14 साल तक यानी 2028 तक आपको हर साल 12000 डालने होंगे और जो हिसाब होगा उसे हर साल 8.6 फिसदी ब्याज मिलता रहेगा। जब आपकी बेटी 21 साल की हो जाएगी तो उसे   रुपए मिलेंगे।

बेटी के शादी से मां बाप बहुत परेशान रहते हैं। इस योजना सुनने से उन्हें काफी राहत मिल जाएगी। कुछ मां-बाप की मजबूरी भी हो जाती है लिंग अनुपात करवाने की।  इस योजना से उन्हें काफी खुशी मिलती है। बेटियों की कमी हो गई थी। हमारी यह योजना हमें एक सहनशक्ति दे रही है। हमें बेटियों को बचाना है। बेटियों के बिना हम अधूरे हैं वो हमारी खुशी है। और खुशी की बात तो यह है कि आप 14 साल में केवल 1.68 लाख जमा करेंगे और आपको 1.68 रुपए + ब्याज के साथ मिलेगा।
बेटियों के लिए सरकार ने यह योजना बनाई है।

सुकन्या समृद्धि योजना योजना के लिए आवश्यक दस्तावेज ( Sukanya Samriddhi Yojna Ke Liye Documents )

इस दस्तावेज में आपको

  • बच्चे के जन्म का प्रमाण पत्र
  • एड्रेस प्रूफ
  • ID प्रूफ
  • सुकन्या समृद्धि योजना का जो फॉर्म है वह ऑनलाइन आपके लिए उपलब्ध है। उस फॉर्म को डाउनलोड करें और उसे भर के ऑनलाइन सबमिट करें।

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Diwali information in hindi

दीपावली-दीयों का पर्व ( Diwali information in Hindi )

भारत पर्व का देश माना जाता है। यहां पर हर होने वाले पर्व पर आपको खुशियां, सुख, शांति और एकता मिलेगी। यह हमारे सांस्कृतिक, परंपरा, सामर्थ्य, सामाजिकता और एकता की कड़ी को जोड़े रखता है। हर एक पर्व का अपना अलग ही महत्व है। परंतु हर एक पर्व हमारी जिंदगी में खुशियां भर देता है। हर एक पर्व के पीछे कोई ना कोई सामाजिक परंपरा या सांस्कृतिक या किसी भी तरह की कथाएं जरुर जुड़ी रहती है। जिससे हमें नया कुछ सीखने को मिलता है।

आज हम जगमगाते दीपों का त्योहार यानी की दीवाली की बात करने जा रहे हैं। जैसे ही यह पर्व आता है उससे पहले ही लोगों के मकान, दुकानें और घरों की सफाई चालू हो जाती है। इस पर्व के आने से लोगों के दिलों में और उनके जिंदगी में एक जोश आ जाता है। एक खुशी की लहर दौड़ने लगती है।

नामकरण- दीपावली दो शब्दों को मिलाकर बना है दीप + अवली। जिसका मतलब होता है दीपों की पंक्ति। इस पर्व पर हर घर में दिए जरूर जलाए जाते हैं। इसी वजह से इसका नाम दीपावली पड़ा।

दीवाली से सम्बद्ध कहानियां-

इस पर्व के साथ अलग-अलग धर्म की अलग-अलग कथाएं जुड़ी हुई है। पर इन सब कथाओं में से सबसे प्रमुख कथा, प्रभु राम की मानी जाती है। क्योंकि इस दिन श्री रामचंद्र जी अत्याचारी रावण को उसके पापी शरीर से मुक्ति दिला कर अयोध्या वापस लौटे थे, और जब वह अयोध्या वापस आए तो उनका राज्य पूरा हर्षित हो गया। क्योंकि वह सबके प्रिय राजा थे। उनके वापस आने की खुशी में लोगों ने दीपों से अपने घर को जगमग कर दिया। तब से यह त्यौहार इसी तरह से मनाया जाने लगा।

यह तो थे राम भक्त के लोगों की कहानी। परंतु कृष्ण भक्ति के लोग इसलिए इस त्योहार को मनाते हैं क्योंकि इसी दिन कृष्ण ने नरकासुर को मारा था और उसके चंगुल से कम से कम 16000 रमणियों को आजादी दिलवाई थी। क्योंकि यह शासक बहुत ही अत्याचारी था, इसलिए इसके मरने की खुशी में लोगों का मन मोर की तरह नाचने लगा और उन्होंने खुशी में अपने घर में दीपक जलाए।

इसके पीछे एक और कथा है। इसी दिन समुद्र मंथन भी हुआ था और समुद्र मंथन होने पर लक्ष्मी जी प्रकट हुई थी। उनके प्रकट होने पर देवताओं ने उनकी पूजा की थी।

वहीं कुछ भक्त यह भी मानते हैं कि इस दिन यानी कि धनतेरस के दिन भगवान विष्णु ने नरसिंह का रूप धरा था और अपने भक्त प्रहलाद को हिरणाकश्यप से छुटकारा दिलाया था।

वहीं सिख धर्म के लोगों की अलग मान्यता है। उनका कहना है कि इसी दिन उनके छठे गुरु हरगोविंद सिंह जी को जेल से रिहाई मिली थी। इसलिए सिख लोग भी इस पर्व को बहुत धूमधाम से मनाते हैं। इसके इलावा कुछ लोग यह भी मानते हैं महर्षि दयानंद को भी इसी दिन स्वर्ग प्राप्त हुआ था।

इस पर्व के साथ बहुत सारी कहानियां जुड़ी हुई है। जितनी भी कहानी आप सुनेंगे वह सब कम है परंतु प्रमुख कहानियां यही है।

पर्व का आयोजन- दीपावली का त्योहार जैसे ही आता है। उसके आगे पीछे त्योहारों की लड़ी लग जाती है। दीपावली से 2 दिन पहले त्रयोदशी को धनतेरस मनाते हैं। धनतेरस पर लोग नए बर्तन खरीदते हैं। चतुर्दशी को नरक चौदस मनाया जाता है। अमावस्या को दीपावली मनाई जाती है। दीपावली से अगले दिन लोग गोवर्धन पूजा के लिए जाते हैं। क्योंकि माना जाता है कि इस दिन कृष्ण जी ने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली से उठाकर गोकुल धाम वासियों की इंद्र के प्रकोप से रक्षा की थी। उस के दूसरे दिन भैया दूज मनाया जाता है।

महत्त्व- इस त्यौहार को छोटे-बड़े, गरीब-अमीर हर तरह की जाती, हर तरह के लोग मनाते हैं। अगर आप बाजारों में जाएंगे तो पूरी बाजार दुल्हन की तरह सजी दिखाई देती है। रंग बिरंगे खिलौने, रंग बिरंगे फूल, पुष्पमालाएं, रंग बिरंगी मिठाईयां देखने को मिलते हैं। वही बालक इस पर्व को लेकर अति उत्साहित रहते हैं और उनका उत्साह पटाखों के जरिए हम देख सकते हैं। सबसे बेहतरीन दृश्य होता है दीवाली की रात का, इस दिन सभी घर ऐसे लगते हैं जैसे शादी वाले घर हैं।

इन सबके अलावा दीपावली व्यापारियों के लिए भी बहुत ही महत्वपूर्ण और शुभ दिन माना जाता है। इस दिन व्यापारी अपने पुराने बही खाता बंद करते हैं और नए तरीके से व्यापार आरंभ करते हैं। सभी धर्म और जाति के लोग इस पर्व को अति उत्साह से मनाते हैं। दिवाली पर सफाई होने के पीछे कारण यह भी है कि दिवाली से पहले वर्षा ऋतु होती है, जिसकी वजह से घर में दुर्गंध आ जाती है और सफाई हो जाने के बाद दिवाली वाले दिन पूरा घर सुगंधित हो उठता है।

दिवाली जैसे उत्साह वाले दिन दुख तब होता है, जब इस दिन लोग इस त्योहार को गलत तरीके से मनाते हैं। कहने का भाव है कि कुछ लोग इस दिन जुआ खेलते हैं, शराब पीते हैं जो कि बिल्कुल ही गलत आदत है। इस दिन हमें नास्तिक,अराष्ट्रीयता और नकरात्मक चीजों का त्याग कर देना चाहिए।

उपसंहार-

दिवाली भारत का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है। इसके महत्व को हमें गलत रूप में नहीं लेकर जाना चाहिए। इसके महत्व को हम समझे। जुआ खेलकर और शराब पीकर इस पर्व को ना मनाए। इस त्यौहार को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाएं। त्योहारों की वजह से ही देश में एकता होती है। इसलिए महत्वता को समझने की कोशिश करें और इसके सभी नियमों का पालन करें। इस महान पर्व पर बुराई करने वालों का विरोध करें और खुद बुराइयों से बचे।

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